विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा स्थापना दिवस मातृ-पितृ सेवा सम्मान :21.09.2025

गाज़ियाबाद : लोहिया नगर हिंदी भवन में विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा का स्थापना दिवस समारोह बड़े ही हर्षोल्लास और गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसे मुख्य अतिथि माननीय डॉ. महेश शर्मा, सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार ने संपन्न किया।

इस अवसर पर मातृ-पितृ उत्कृष्ट सेवा करने वाले 108 महानुभावों को “श्रवण कुमार उपाधि” से सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि डॉ. महेश शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह आयोजन वास्तव में ऐतिहासिक है, क्योंकि पहली बार मातृ-पितृ सेवा जैसे महान कर्तव्य को इतने उच्च स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें मातृ-पितृ भक्ति में ही निहित हैं। हमारे शास्त्रों में माता-पिता को देवताओं के समान स्थान दिया गया है—“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव”—और श्रवण कुमार जैसी आदर्श कथाएँ हमारे समाज में यह शिक्षा देती रही हैं कि संतान का सबसे बड़ा धर्म माता-पिता की सेवा है।
डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि ब्राह्मण समाज ने न केवल वेदों और उपनिषदों के माध्यम से ज्ञान का संचार किया, बल्कि साहित्य, संस्कृति, धर्म, विज्ञान और राजनीति जैसे विविध क्षेत्रों में भी अमिट छाप छोड़ी है। स्वतंत्रता संग्राम में भी ब्राह्मण समाज के विद्वानों और संतों ने त्याग और बलिदान की परंपरा को जीवित रखा। उन्होंने कहा कि इस समाज की सबसे बड़ी शक्ति इसकी विद्या, तप, संयम और त्याग की भावना है, जो इसे युगों-युगों से समाज का मार्गदर्शक बनाती आई है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ब्राह्मण समाज की गौरवशाली परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी वैदिक काल में थी। आधुनिक भारत के निर्माण में इस समाज का योगदान संविधान निर्माण से लेकर राष्ट्र की सुरक्षा और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तक हर क्षेत्र में देखने को मिलता है। डॉ. शर्मा ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी ब्राह्मण समाज अपनी विद्या, धर्मनिष्ठा और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को सेवा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति की अमूल्य धरोहर प्रदान करेगा।

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक श्री संजीव शर्मा, पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल अग्रवाल और सांसद श्री अतुल गर्ग उपस्थित रहे। सभी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए ब्राह्मण समाज की विद्या, तप और त्याग की परंपरा को समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताया।

कार्यक्रम में धर्माचार्य महंत गिरिशानंद गिरी और महंत शैलेंद्र गिरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने ब्राह्मण समाज को शांति, आत्मसंयम और विद्या के प्रसार का अग्रदूत बताया। इस अवसर पर विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर ब्रह्मऋषि विभूति बी.के. शर्मा हनुमान ने संगठन की भावी दिशा पर विचार रखे और समाजोत्थान की कार्ययोजना को रेखांकित किया।

राष्ट्रीय महासचिव श्री शैलेंद्र शर्मा, कार्यक्रम संयोजक श्री नानक चंद शर्मा (उर्फ शालू), राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री रविंद्र शर्मा और धर्माचार्य प्रमुख बृज किशोर बृजवासी ने कार्यक्रम संचालन एवं संयोजन की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।

समारोह में राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक गण्यमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे। इनमें पूर्व विधायक श्री सुरेंद्र कुमार मुन्नी, भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष श्री मयंक गोयल, अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष (दिल्ली) श्री विजय कृष्णा पांडे, पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष श्री अजय शर्मा और वरिष्ठ समाजसेवी श्री वी.के. अग्रवाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे।
इसके अतिरिक्त, संगठन के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सक्रिय सदस्यों—लोकेश कौशिक, विनीत शर्मा, राकेश शास्त्री, आर.सी. शर्मा, मधु शर्मा, प्रीति राय, चंद्र सीमा भार्गव, प्रमोद कुमार शर्मा, डॉ. सतीश भारद्वाज, कपिल पंडित, विनीत कुमार शर्मा, देवेंद्र शर्मा, शिवकुमार शर्मा, मनोज शर्मा, देवाशीष ओझा, संजय कुमार शुक्ला, रघुनंदन भारद्वाज, ऋषिपाल शर्मा, नीरज शर्मा, अमित शर्मा, अशोक भारतीय, राहुल शर्मा, सुभाष शर्मा, कार्तिक शर्मा, अंकित शर्मा, सचिन भारतीय, सुजीत कुमार, एस.पी. गुप्ता, दिनेश गौतम और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

इस भव्य आयोजन ने न केवल ब्राह्मण समाज की एकता और परंपरा को उजागर किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी प्रस्तुत किया।

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