जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज, सनातन चेतना के कालजयी आचार्य

संस्थापक संरक्षक श्री राम कर्म भूमि न्यास 

जब कोई संत समस्त वेदोंउपनिषदों और रामकथा के अमृत को श्रवणस्मरण और साधना से आत्मसात कर ले , वह भी जन्म से नेत्रहीन होकर तो समझ लीजिएवह कोई साधारण संत नहींअपितु धर्म का दिव्य अवतार है। जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज ऐसे ही एक युगपुरुष हैंजिनकी जीवनगाथा स्वयं में रामचरित की नवरचना है।

वे तुलसीपीठाधीश्वर हैं, उस चित्रकूट धाम के अधिष्ठाताजहाँ वनवासी श्रीराम की स्मृतियाँ वायु में गूंजती हैं और जहाँ महात्मा तुलसीदास की आत्मा नित्य निवास करती है। इस पीठ को उन्होंने वेदभक्तिनीति और लोकसेवा के संगम स्थल के रूप में स्थापित किया है। यह कोई ईंट-पत्थर का स्थान नहींअपितु संस्कृति का स्पंदनशील तीर्थ-क्षेत्र है।

महाराजश्री की वाणी में संस्कृत का सौंदर्यअवधी की माधुरीऔर भक्ति का बल समाहित है। उन्होंने ‘श्रीराम काव्य’, ‘भावार्थ रामायण’, ‘गीत रामायण’, ‘राम भक्ति जैसे अनेक कालजयी ग्रंथों की रचना की है। उनके शब्दों में शास्त्र नहींश्रीराम का साक्षात स्वरूप प्रकट होता है।

उन्होंने न केवल ग्रंथ रचेअपितु मानवता का कलेवर भी रचा। दिव्यांग जनों के लिए उन्होंने शिक्षाजीवनोपयोगी साधन और आत्मविश्वास की ज्योति जलायी। उनकी प्रेरणा से चल रहे संस्थानों में अनेक ऐसे छात्र हैंजो जीवन में स्वावलंबी बनेज्ञान के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किए।

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका केवल प्रवचनकर्ता की नहीं रही,वे सनातन के सैन्यवृंद में धर्म-सैनिक के रूप में सक्रिय थे। जब भूमि-पूजन का शुभ अवसर आयातो वे उन विरले संतों में सम्मिलित थेजिन्हें श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र द्वारा आमंत्रित किया गया। उनका वहाँ होना केवल उपस्थिति नहींयुगों की प्रतीक्षा का साक्षात्कार था।

वे मानते हैं कि सनातन धर्म कोई वाद नहींबल्कि जीवन की परम विधि है। वे केवल एक जगद्गुरु नहींजीवित शास्त्रचेतन तीर्थ और कर्म-योगी सन्यासी हैं। उनके प्रवचनों में रामचरितमानस केवल पढ़ा नहीं जाताश्रोताओं की आत्मा में उतरकर उन्हें राममय बना देता है।

उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि मन में श्रद्धा होतो शरीर की सीमाएँ अर्थहीन हो जाती हैं। वे धैर्य के हिमालयश्रुति के सागर  और भक्ति के सूर्य हैं जो न केवल भारतवर्ष मेंअपितु विश्व भर में सनातन धर्म की ध्वजा को उच्चतर शिखर पर फहराते चले जा रहे हैं।

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