नीति को कार्यरूप देने वालों का परिचय- करुणा शंकर त्रिवेदी
तकनीक और परंपरा का संतुलित समन्वय
करुणा शंकर त्रिवेदी का व्यक्तित्व समकालीन भारत के उस विचार को दर्शाता है जहाँ विज्ञान और संस्कृति साथ-साथ चलते हैं। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में उन्होंने तकनीकी क्षेत्र में दक्षता हासिल की है, वहीं होटल व्यवसाय के क्षेत्र में भी उन्होंने सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाई है। इन दोनों भिन्न क्षेत्रों का अनुभव उनके नेतृत्व को अद्वितीय बनाता है। यह संतुलन उन्हें किसी भी संगठन की संरचनात्मक, प्रबंधकीय और रणनीतिक आवश्यकताओं को समझने और उन्हें सुचारु रूप से संचालित करने में समर्थ बनाता है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि आधुनिकता का आशय परंपरा को विस्मृत करना नहीं, बल्कि उसे प्रासंगिक रूप में आगे बढ़ाना है।
संस्कृति, समाज और राष्ट्र पर स्पष्ट चिंतन
केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित न रहकर, श्री त्रिवेदी निरंतर सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्शों में सक्रिय रहते हैं। भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराएं, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय अस्मिता—इन सभी विषयों पर उनका चिंतन स्पष्ट, संतुलित और विचारोत्तेजक होता है। वे मानते हैं कि भारत की आत्मा इसकी संस्कृति में निहित है और यदि हम उसे जीवित नहीं रख पाए, तो विकास केवल बाहरी आवरण बनकर रह जाएगा। वे युवाओं को प्रेरित करते हैं कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। वे यह संदेश देते हैं कि राष्ट्रनिर्माण केवल तकनीकी दक्षता से नहीं, सांस्कृतिक चेतना से भी होता है।
नेतृत्व जो दिशा भी देता है और संवाद भी करता है
ब्राह्मण भवन -अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ- के निदेशक के रूप में श्री त्रिवेदी की भूमिका केवल संगठन के संचालन तक सीमित नहीं है। वे विचारों के आदान-प्रदान में विश्वास रखते हैं और संगठन को केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि एक वैचारिक मंच मानते हैं। उनका नेतृत्व समावेशी है—जिसमें परामर्श, संवाद, और सामूहिक सहभागिता को प्राथमिकता दी जाती है। वे युवाओं को संगठन से जोड़ने, उन्हें नेतृत्व के लिए तैयार करने और सामाजिक सरोकारों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका यह दृष्टिकोण उन्हें मात्र एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक वैचारिक पथप्रदर्शक के रूप में प्रतिष्ठित करता है।
करुणा शंकर त्रिवेदी आधुनिक सोच और परंपरागत मूल्यों के संयोजन का जीवंत उदाहरण हैं। उनका कार्यक्षेत्र जितना व्यापक है, उतनी ही गहराई उनके विचारों में है। वे आज की पीढ़ी को यह सिखा रहे हैं कि जड़ों से जुड़कर ही हम ऊँचाई तक पहुँच सकते हैं।
नीति को कार्यरूप देने वालों का परिचय- करुणा शंकर त्रिवेदी
तकनीक और परंपरा का संतुलित समन्वय
करुणा शंकर त्रिवेदी का व्यक्तित्व समकालीन भारत के उस विचार को दर्शाता है जहाँ विज्ञान और संस्कृति साथ-साथ चलते हैं। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में उन्होंने तकनीकी क्षेत्र में दक्षता हासिल की है, वहीं होटल व्यवसाय के क्षेत्र में भी उन्होंने सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाई है। इन दोनों भिन्न क्षेत्रों का अनुभव उनके नेतृत्व को अद्वितीय बनाता है। यह संतुलन उन्हें किसी भी संगठन की संरचनात्मक, प्रबंधकीय और रणनीतिक आवश्यकताओं को समझने और उन्हें सुचारु रूप से संचालित करने में समर्थ बनाता है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि आधुनिकता का आशय परंपरा को विस्मृत करना नहीं, बल्कि उसे प्रासंगिक रूप में आगे बढ़ाना है।
संस्कृति, समाज और राष्ट्र पर स्पष्ट चिंतन
केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित न रहकर, श्री त्रिवेदी निरंतर सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्शों में सक्रिय रहते हैं। भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराएं, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय अस्मिता—इन सभी विषयों पर उनका चिंतन स्पष्ट, संतुलित और विचारोत्तेजक होता है। वे मानते हैं कि भारत की आत्मा इसकी संस्कृति में निहित है और यदि हम उसे जीवित नहीं रख पाए, तो विकास केवल बाहरी आवरण बनकर रह जाएगा। वे युवाओं को प्रेरित करते हैं कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। वे यह संदेश देते हैं कि राष्ट्रनिर्माण केवल तकनीकी दक्षता से नहीं, सांस्कृतिक चेतना से भी होता है।
नेतृत्व जो दिशा भी देता है और संवाद भी करता है
ब्राह्मण भवन -अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ- के निदेशक के रूप में श्री त्रिवेदी की भूमिका केवल संगठन के संचालन तक सीमित नहीं है। वे विचारों के आदान-प्रदान में विश्वास रखते हैं और संगठन को केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि एक वैचारिक मंच मानते हैं। उनका नेतृत्व समावेशी है—जिसमें परामर्श, संवाद, और सामूहिक सहभागिता को प्राथमिकता दी जाती है। वे युवाओं को संगठन से जोड़ने, उन्हें नेतृत्व के लिए तैयार करने और सामाजिक सरोकारों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका यह दृष्टिकोण उन्हें मात्र एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक वैचारिक पथप्रदर्शक के रूप में प्रतिष्ठित करता है।
करुणा शंकर त्रिवेदी आधुनिक सोच और परंपरागत मूल्यों के संयोजन का जीवंत उदाहरण हैं। उनका कार्यक्षेत्र जितना व्यापक है, उतनी ही गहराई उनके विचारों में है। वे आज की पीढ़ी को यह सिखा रहे हैं कि जड़ों से जुड़कर ही हम ऊँचाई तक पहुँच सकते हैं।










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