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ज्ञानेश्वर दुबे
निवास: मुंबई, पटना
फोन: 9821644002
परिचय — एक सुनहरे स्वर के महान कलाकार
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
श्री ज्ञानेश्वर दुबे एक अत्यंत प्रतिभाशाली गायक और संगीत निर्देशक हैं, जिनकी सुनहरी आवाज़ दिल से निकलकर श्रोताओं के हृदय को स्पर्श करती है। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से साइंस और लॉ में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। संगीत की दुनिया में उनका प्रवेश केवल संयोग नहीं बल्कि पारिवारिक विरासत का परिणाम है।
संगीत की विरासत
ज्ञानेश्वर जी को संगीत की अमूल्य विरासत अपने दादाजी श्री कंतिप्रसाद दुबे से मिली। बाद में उन्होंने पंडित प्रह्लाद मिश्र को गुरु मानकर संगीत की बारीकियाँ सीखीं। प्रारंभिक प्रशिक्षण के उपरांत वे महान गुरु श्री मोहिंद्र जीत सिंह के प्रभाव में आए, जो आज के कई स्टार गायकों के निर्माता माने जाते हैं।
शिक्षा –
विज्ञान स्नातक Bsc Honours (zoology), पटना विश्वविद्यालय
लॉ में स्नातक , पटना विश्वविद्यालय
वोकल क्लासिकल म्यूज़िक में डिप्लोमा , संगीत संस्थान
शैक्षिक उपलब्धि
म्यूज़िक में डिप्लोमा, स्वर्ण पदक
प्रथम अंतर्राष्ट्रीय युवा महोत्सव और लखनऊ में ‘सर्वश्रेष्ठ गायक’ के रूप में पुरस्कृत ।
संगीत जगत में प्रवेश और सफलता
बहुत कम समय में उन्होंने भारत और विदेशों के श्रोताओं के बीच स्थान बना लिया।
लोक संगीत में योगदान– प्रमुख लोक-एल्बम:
- “टनाटन घंटी बजाय” (सी.एम.के. म्यूज़िक)
- “पान अलेई येई मखान अलेई येई” (एस.एस.बी.टी. सीरीज़)
- “चल चहक दोकान मे” (एस.एस.बी.टी. सीरीज़)
- “सोल्हे बरस मे” (सुमीत कैसेट)
- “गोरकी कनियां” (अलंकार म्यूज़िक)
- “बाप रौ बाप” (आई.एन.ए. म्यूज़िक)
- “होली का हुर्दंग” (टी-सीरीज़)
श्रोताओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय गीत:
- “जय बम भोले” (पी.के. कम्युनिकेशन),
- “चलो बुलावा शंकर जी का” (शिव ऑडियो),
- “कंवर का घुंघुरु बजाय” (टी-सीरीज़
- “माँ की महिमा” (अलंकार म्यूज़िक)।
हिंदी पॉप संगीत में सफलता
- हिंदी पॉप एल्बम: “ओ डार्लिंग” (टी-सीरीज़
- “हॉट पैंट मे” (इंडिया म्यूज़िक)
- “कमाल है धमाल है” (गौरव आर्ट इंटरनेशनल)।
टीवी/फ़िल्मों के लिए गायन:
- “संकल्प” (हिंदी धारावाहिक),
- “कैकेयी” (हिंदी धारावाहिक),
- “निर्मोही मतवारे” (संस्कृत धारावाहिक),
हिंदी फ़ीचर फ़िल्म
- “हम बच्चे हिंदुस्तान के” (धनपत मेहता प्रोडक्शन),
- “धारावी” (हिंदी फ़ीचर फ़िल्म),
- “ला ईलाज” (तेली हिंदी फ़िल्म),
- “करोड़ों में एक” (डी. मेहता प्रोडक्शन),
- “पायल” (भाग्यश्री व हिमाली ),
- “काटिल कौन” (संगीत रहीम),
- “घैरतमंद” ( संगीत मोहिंदरजीत सिंह)।
संगीत निर्देशन– हिंदी फ़िल्में:
- “तुझको पुकारे” (हिंदी फ़ीचर फ़िल्म)
मैथिली फ़िल्में:
- “आओ पिया हमार नगरी” (मैथिली फ़ीचर फ़िल्म),
- “कखन हरब दुख मोर”,
- “घुइर के आओत बसंत”,
- “सेनुरा”
- अभी तत्काल में, मैं मैथिली टी.वी सिरियल “रामायण” में संगीत निर्देशन करने जा रहा हूँ ।
संस्कृत सीरियल-
- “मृच्छकटिकम”
- “निर्मोही मतवारे” (संस्कृत धारावाहिक),
ग़ज़लों के परिचयात्मक एल्बम
- “जाम-ए-ग़ज़ल” (टी-सीरीज़)
नवीन परियोजनाएँ
- “तुझ को पुकारे”- हिंदी फ़िल्म संगीत निर्देशक और गायन;
- “ये मिथिला प्रदेश”; नवीनतम हिंदी भक्ति एल्बम
- “बाबू जी” (मैथिली) में संगीत- वर्तमान में
अंतर्राष्ट्रीय मान्यता और प्रदर्शन
- दक्षिण अफ़्रीका (डरबन): 26 जनवरी 2012 से 5 फ़रवरी 2012 तक विभिन्न स्थलों पर आमंत्रित लाइव कॉन्सर्ट।
- केन्या (नैरोबी): 15 मार्च 2014 — “होली महोत्सव” में लाइव प्रस्तुति।
- अमेरिका (ह्यूस्टन, टेक्सास): 30 अगस्त 2015 — लाइव कॉन्सर्ट ।
- साथ ही, मैथिली फ़िल्म “हाफ मर्डर” के लिए गायन और “संस्कार” के लिए शीर्षक गीत।
वर्तमान कार्य
“राजा सल्हेश” मैथिली की ऐतिहासिक फ़िल्म का संगीत निर्देशन।
उपसंहार
ज्ञानेश्वर दुबे का संगीत-सफ़र उनकी अद्भुत प्रतिभा, कड़ी मेहनत और गुरुओं के आशीर्वाद का परिणाम है। वे केवल गायक नहीं, भारतीय संगीत परंपरा के सच्चे संवाहक हैं, जो अपनी कला से लाखों दिलों में खुशी और संतुष्टि भर रहे हैं।
सांस्कृतिक संस्थान का समर्थन
स्वरांजलि कल्चरल ट्रस्ट उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।














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