वैश्विक हिंदी महासभा – परिचय एवं नियमावली
भारत के अलावा विश्व के 14 देशों में संचालि
यह ट्रस्ट दिनांक 27/07/23 ई० डॉ०विजयानन्द (मूल नाम-बिजेन्द्र प्रताप तिवारी) पुत्र श्री रमाकांत तिवारी, निवासी -183 हवेलिया, प्रतिष्ठानपुर (झूसी ),प्रयागराज,उ०प्र० के द्वारा निष्पादित किया गया है। यह ट्रस्ट गैर राजनीतिक, गैर सरकारी, धर्म-जाति वर्ग से ऊपर उठकर हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा बनवाने एवं वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु, शैक्षिक,सामाजिक, आध्यात्मिक आदि उद्देश्यों के लिए वैश्विक हिंदी महासभा न्यास की स्थापना की गयी
ट्रस्ट के उद्देश्य-
1. भारतीय संविधान के अनुरूप हिंदी को राष्ट्रभाषा बनवाना तथा त्रिभाषा सूत्र पूरे भारत में लागू करवाना।
2. हिंदी की प्रगति , प्रचार एवं भाषाई समन्वय के लिए समारोहों ,संगोष्ठियों, अनुवाद कार्यशालाओं,कवि सम्मेलनों आदि का आयोजन करना तथा इसके लिए सरकारी, गैर सरकारी संस्थानों से अनुदान तथा अन्य सहयोग प्राप्त करना।
3. उन देशों में हिंदी के प्रचार प्रसार हेतु समितियां बनाना ,जहां पर हिंदी प्रचलन में है।
4. भारत सरकार द्वारा आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलनों में संस्था के प्रतिनिधियों को भिजवाना
5.शैक्षिक, सामाजिक, आध्यात्मिक तथा चिकित्सकीय दृष्टि से हिंदी तथा भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों का आयोजन करना।
6. छात्र-छात्राओं, शोधकर्ताओं आदि को प्रोत्साहित करने के लिए विविध कार्यक्रमों, कार्यशालाओं आदि का आयोजन करना ।
7. हिंदी से जुड़े सभी महानुभावों के प्रोत्साहन के लिए पुरस्कारों, सम्मानों आदि की घोषणा करना।
8. न्यास /ट्रस्ट की गतिविधियों के प्रचार -प्रसार के लिए वार्षिक स्मारिका एवं शोधार्थियों के लिए त्रैमासिक ‘शोध संगम ‘ पत्रिका का प्रकाशन करना और यूजीसी केयर लिस्ट में शामिल कराना।
9. राष्ट्रभाषा के प्रचार के लिए वे सभी कार्य करना, जिसमें जन मन गण का हित हो।









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